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भारतीय शादी के फ़ंक्शन का ऑर्डर

भारतीय शादी के फ़ंक्शन आमतौर पर किस क्रम में होते हैं, दिन-ब-दिन, और पंजाब से तमिलनाडु, बंगाल से केरल तक क्या फ़र्क़ है।

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भारतीय शादी के फ़ंक्शन का ऑर्डर

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भारतीय शादी के फ़ंक्शन किस क्रम में होते हैं? (shaadi ke functions ka order)

भारतीय शादी के फ़ंक्शन आमतौर पर इस क्रम में होते हैं: रोका या सगाई, मेहंदी, संगीत, हल्दी, शादी की रस्में, विदाई और रिसेप्शन। शादी से पहले वाले फ़ंक्शन ज़्यादातर शादी से दो-तीन दिन पहले होते हैं। इलाके और कम्युनिटी के हिसाब से क्रम बदलता है, इसलिए तमिल, बंगाली, सिख और मुस्लिम शादियों का अपना-अपना क्रम होता है।

At a glance
हफ़्तों या महीनों पहले

रोका या सगाई

दो-तीन दिन पहले

मेहंदी, संगीत, हल्दी

शादी का दिन

बारात, वरमाला, कन्यादान, फेरे

बाद में

विदाई, फिर रिसेप्शन

भारतीय शादी शायद ही कभी एक इवेंट होती है। यह कई दिनों तक चलने वाले फ़ंक्शन की एक लड़ी है, हर फ़ंक्शन की अपनी गेस्ट लिस्ट, अपना ड्रेस कोड और अपना माहौल: एक सुबह शांत आशीर्वाद, अगली रात डांस का मुक़ाबला, और सुबह-सुबह पवित्र अग्नि।

नीचे दिया क्रम वही है जो ज़्यादातर गाइड बताती हैं, और यह उत्तर भारत की हिंदू शादियों पर आधारित है। यह हर जगह एक जैसा नहीं होता। आगे आप देखेंगे कि तमिल, तेलुगु, बंगाली, गुजराती, मराठी, सिख, मुस्लिम और ईसाई शादियों में क्या अलग होता है।

भारतीय शादी के फ़ंक्शन आमतौर पर किस क्रम में होते हैं?

  • रोका या सगाई। दोनों परिवार रिश्ता पक्का करते हैं, अक्सर शादी से हफ़्तों या महीनों पहले। सगाई पर अंगूठियाँ भी बदली जा सकती हैं।
  • मेहंदी। दुल्हन के हाथों और पैरों पर मेहंदी लगती है, आमतौर पर शादी से एक-दो दिन पहले।
  • संगीत। गाने, डांस और परिवार की परफ़ॉर्मेंस वाली एक रात।
  • हल्दी। दूल्हा-दुल्हन को हल्दी का लेप लगाया जाता है, अक्सर शादी की सुबह या एक-दो दिन पहले (Tatler Asia, 2024)।
  • शादी। असली रस्में, आमतौर पर शुभ समय यानी मुहूर्त पर।
  • विदाई। दुल्हन का अपने परिवार से विदा लेना।
  • रिसेप्शन। नए जोड़े को सबसे मिलवाने की पार्टी, जिसे अक्सर दूल्हे का परिवार रखता है।

पहले मेहंदी या संगीत? यह परिवार पर निर्भर है। कई परिवार दोनों को अलग-अलग शाम रखते हैं, और अब कई दोनों को एक ही रात में मिला देते हैं।

शादी के दिन क्या-क्या होता है?

उत्तर भारत की कई शादियों में दिन कुछ इस तरह चलता है:

  • बारात: दूल्हा गाजे-बाजे और डांस के साथ आता है, कभी-कभी घोड़ी पर।
  • मिलनी: पंजाबी परिवारों में दोनों पक्षों के बड़े एक-दूसरे से मिलते और गले लगते हैं।
  • वरमाला: दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे को माला पहनाते हैं।
  • कन्यादान: दुल्हन के माता-पिता उसका हाथ दूल्हे के हाथ में देते हैं। कुछ परिवार अब इस रस्म को बदलकर निभाते हैं।
  • फेरे: जोड़ा पवित्र अग्नि के चारों ओर फेरे लेता है, अक्सर सात, और वचन देता है।
  • सिंदूर और मंगलसूत्र: दूल्हा दुल्हन की माँग में सिंदूर भरता है और मंगलसूत्र पहनाता है।

मुहूर्त सुबह-सुबह, दोपहर में या आधी रात के बाद भी हो सकता है, इसलिए कार्ड पर लिखा शादी का समय पार्टी के समय से ज़्यादा मायने रखता है।

दक्षिण भारत की शादियाँ कैसे अलग होती हैं?

  • तमिल शादियाँ अक्सर निच्चयतार्थम से शुरू होती हैं, यानी औपचारिक सगाई। कई तमिल ब्राह्मण शादियों में उसी दिन दूल्हा एक नकली तीर्थयात्रा, काशी यात्रा, पर निकलता है, और फिर दुल्हन के पिता उसे शादी के लिए मना लेते हैं। थाली मुहूर्तम पर बाँधी जाती है, और कई तमिल परिवारों में रिसेप्शन एक शाम पहले होता है।
  • तेलुगु शादियों में पेल्लिकूतुरु और पेल्लिकोडुकु होते हैं, जब दुल्हन और दूल्हे को नहलाकर शादी के लिए तैयार किया जाता है। मुहूर्तम पर जोड़ा एक-दूसरे के सिर पर जीलकर्रा बेल्लम रखता है, फिर एक-दूसरे पर तलंब्रालु, यानी हल्दी वाले चावल, बरसाता है।
  • केरल की हिंदू शादियाँ अक्सर छोटी होती हैं, कभी-कभी एक घंटे से भी कम, और थाली बाँधने के इर्द-गिर्द होती हैं।

पूर्व और पश्चिम भारत की शादियाँ कैसे अलग होती हैं?

  • बंगाली हिंदू: आशीर्बाद (आशीर्वाद), गाये होलुद (हल्दी), फिर शादी, आमतौर पर शाम को, जिसमें सात पाक, शुभो दृष्टि और सिंदूर दान होते हैं। बौ भात, दूल्हे के घर पर, बाद में होता है।
  • गुजराती: पीठी (हल्दी), और गरबा या रास की एक रात, जो अक्सर संगीत की जगह ले लेती है।
  • मराठी: हलद (हल्दी), और अंतरपाट, यानी दूल्हा-दुल्हन के बीच पकड़ा गया एक कपड़ा, जो मंगलाष्टक के श्लोक ख़त्म होने तक रहता है।

सिख, मुस्लिम और ईसाई शादियों का क्या?

  • कई सिख शादियों में, पंजाब और विदेशों दोनों में, रोका, कुड़माई (सगाई), चुन्नी चढ़ाना, माइयाँ (हल्दी) और देर रात की जागो होते हैं, फिर गुरुद्वारे में आनंद कारज, आमतौर पर सुबह, और फिर डोली (विदाई)।
  • दक्षिण एशिया की कई मुस्लिम शादियों में मंगनी, मांझा या मायूँ (हल्दी), मेहंदी, निकाह, रुख़सती और वलीमा की दावत होते हैं।
  • केरल की सीरियन क्रिश्चियन शादियों में अक्सर मधुरम वैप्पु, यानी मिठाई बाँटने की रस्म, और चर्च में शादी होती है जहाँ दूल्हा मिन्नु बाँधता है। गोवा और मैंगलोर के कैथोलिक परिवार शादी से पहले रोस करते हैं, यानी नारियल के दूध से अभिषेक।

विदेश में रहने वाले परिवारों में क्रम कैसे बदलता है?

अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और UAE में कई जोड़े सारे फ़ंक्शन एक लंबे वीकेंड में कर लेते हैं: शुक्रवार को मेहंदी और संगीत, शनिवार सुबह शादी, और उसी रात रिसेप्शन। वहाँ परंपरा से ज़्यादा वेन्यू की बुकिंग और गेस्ट का सफ़र तय करते हैं कि शेड्यूल क्या होगा।

ये रस्में ईसाई, यहूदी, चीनी और योरूबा शादियों के मुक़ाबले कैसी दिखती हैं, यह जानने के लिए हमारी गाइड दुनिया भर की शादी की रस्में देखें।

कई फ़ंक्शन प्लान कर रहे हैं?

हर फ़ंक्शन की अक्सर अपनी अलग गेस्ट लिस्ट होती है। Evatril पर एक ही इन्विटेशन में हर फ़ंक्शन सब-इवेंट के रूप में जुड़ सकता है, और हर गेस्ट सिर्फ़ उन्हीं फ़ंक्शन का जवाब देता है जिनमें उसे बुलाया गया है। देखें Evatril किन मौकों के लिए बना है, और हमारी गाइड भारतीय शादियों के लिए Multi-RSVP सेट करना बताती है कि Evatril हर फ़ंक्शन की अलग गिनती कैसे देता है।

Did you know?

हिंदू शादी किसके रीति-रिवाज़ से हो सकती है?

भारत के हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत हिंदू शादी दुल्हन या दूल्हे, किसी भी पक्ष के रीति-रिवाज़ से हो सकती है (धारा 7(1))।

Did you know?

हिंदू शादी कब पक्की मानी जाती है?

जहाँ रस्मों में सप्तपदी होती है, यानी पवित्र अग्नि के सामने साथ लिए गए सात कदम, वहाँ कानून कहता है कि सातवाँ कदम पूरा होते ही शादी पूरी और पक्की मानी जाती है (धारा 7(2))।

Did you know?

हल्दी का लेप किससे बनता है?

Tatler Asia (2024) के मुताबिक हल्दी का लेप हल्दी, चंदन पाउडर, गुलाबजल और दूसरी प्राकृतिक चीज़ों से बनता है, और यह दूल्हा-दुल्हन के लिए एक पारंपरिक फ़ेशियल का काम भी करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कोई एक सही क्रम नहीं है। उत्तर भारत में आम क्रम है रोका या सगाई, मेहंदी, संगीत, हल्दी, शादी की रस्में, विदाई और रिसेप्शन। दक्षिण भारतीय, बंगाली, सिख, मुस्लिम और ईसाई शादियों में फ़ंक्शन और समय अलग होते हैं, इसलिए अपने इन्विटेशन पर दिया क्रम मानें।
कई परिवारों में पहले मेहंदी होती है, अक्सर दोपहर में, और संगीत उसी शाम या अगले दिन। कुछ परिवार पहले संगीत रखते हैं, और अब कई दोनों को एक ही रात में कर लेते हैं। इन्विटेशन देख लें, क्योंकि हर परिवार अपना क्रम खुद तय करता है।
आमतौर पर मुख्य फ़ंक्शन के लिए दो से चार दिन, और सगाई हफ़्तों या महीनों पहले। कुछ परिवार सब कुछ एक ही लंबे दिन में कर लेते हैं, जबकि डेस्टिनेशन वेडिंग पाँच दिन तक भी चल सकती है। विदेश में रहने वाले जोड़े अक्सर सब कुछ एक वीकेंड में निपटा लेते हैं।
उत्तर भारत के कई परिवारों में पहले मेहंदी होती है, शादी से एक-दो दिन पहले, और हल्दी शादी की सुबह या एक दिन पहले। कुछ परिवार इसका उल्टा करते हैं, या दोनों एक ही दिन रखते हैं।
उत्तर भारत की ज़्यादातर शादियों में रिसेप्शन शादी के बाद होता है, अक्सर उसी रात या एक-दो दिन बाद। कई तमिल परिवारों में यह मुहूर्तम से एक शाम पहले होता है। बंगाली परिवार शादी के बाद दूल्हे के घर पर बौ भात रखते हैं।